राष्ट्रपति के दया याचिका खारिज करने के खिलाफ दोषी विनय ने एससी का रुख किया

 नई दिल्ली। फांसी के फंदे से बचने के लिए निर्भया के दोषियों ने एक और हथकंडा अपनाया है. निर्भया के गुनाहगार विनय शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर राष्ट्रपति की ओर से दया याचिका खारिज होने के फैसले को चुनौती दी है. विनय की अर्जी में कहा गया कि राष्ट्रपति ने पूरी प्रक्रिया का पालन किए बिना ही जल्दबाजी में अर्जी पर फैसला लिया. विनय की दया अर्जी को राष्ट्रपति ने 1 फरवरी को खारिज कर दी थी. इसकी जानकारी दोषी विनय के वकील एपी सिंह ने दी है.वहीं, कानूनी राहत के विकल्प खत्म कर चुके निर्भया के गनाहगारों को फांसी की सजा पर अमल की मांग को लेकर केंद्र की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. स्ष्ट ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया कि वो नया डेथ वारंट जारी करने के लिए ट्रायल कोर्ट जाए.सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तीन दोषियों की सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन, क्यूरेटिव याचिका और राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज हो चुकी है. अगर चौथे दोषी पवन ने दया याचिका दायर नहीं की अरविंद है तो उसे इसके लिए मजबूर तो नहीं किया जा सकता है. आप निचली अदालत से नया डेथ वारंट जारी करने का अनुरोध करे.सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जैसे ही नया डेथ वारंट जारी होगा, चौथा दोषी पवन फांसी की सजा रोकने के लिए अर्जी दाखिल कर देगा. चंकि ॥ष्ट का कहना है कि सभी दोषियों को एक साथ ही फांसी दी जा सकती है, अलग-अलग नहीं. लिहाजा दोषी जानबूझकर कर फांसी को टालने के लिए कानूनी राहत के विकल्प नहीं आजमा रहे.स्त्र तुषार मेहता ने कहा सभी दोषियों को कानूनी राहत विकल्प आजमाने के लिए दिल्ली ॥ष्ट से मिली सात दिनों की मोहलत आज खत्म हो रही है. लेकिन अभी तक चौथे दोषी पवन की ओर से स्ष्ट में क्यूरेटिव या राष्ट्रपति के सामने दया याचिका दायर नहीं की गई है. मुकेश, विनय, अक्षय की दया याचिका राष्ट्रपति खारिज कर चके है.स्त्र ने कोर्ट से आग्रह किया कि अब अगर नया डेथ वारंट जारी होता है तो दोषिया का 14 दिन की मोहलत नहीं मिलनी चाहिए, कानूनी राहत के विकल्प खत्म कर चुके निर्भया के गुनाहगारों की फांसी की मांग पर स्ट ने दोषियों को नोटिस जारी किया है. स्त्र ने सरकार कहा कि आप नया डेथ वारंट जारी करवाने के लिए ट्रायल कोर्ट जा सकते हैं.क्या दोषियों को अलग-अलग फासी दी जा सकती है इस पर आगे सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई करेगा. एक महत्वपूर्ण बात ये भी है कि स्ष्ट ने ये साफ किया है कि केंद्र की अर्जी का स्ष्ट में लंबित रहने का ट्रायल कोर्ट द्वारा निर्भया के गुनाहगारों के लिए नया डेथ वारंट जारी करने पर कोई असर नहीं काइ असर नहा पड़ेगा. यानी स्ष्ट में सुनवाई सिर्फ इस बड़े सवाल पर केंद्रित रहेगी कि एक गुनाह में सभी गुनाहगारों को क्या एक साथ ही फांसी की सजा जरूरी है.